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क्लाउड कंप्यूटिंग से जुड़े कुछ तथ्य..?

लाउड के दायरे में आने वाली प्रमुख तकनीक को इन्सटॉल करने और इसके रखरखाव के लिए सेवा प्रदाता जिम्मेवार होता है. कुछ उपभोक्ता इस मॉडल को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इसे खुद प्रबंध करने के भार से कुछ हद तक मुक्ति मिल जाती है. हालांकि, इस मॉडल के तहत उपभोक्ता सीधे व्यवस्था को नियंत्रित नहीं कर सकता और इसके लिए वह पूरी तरह से सेवा प्रदाता पर निर्भर रहता है.
क्लाउड कंप्यूटिंग सिस्टम्स को आम तौर पर इस तरह से डिजाइन किया जाता है ताकि वह सिस्टम रिसोर्सेज की सभी चीजों को खोज सके, जिसके एवज में सेवा प्रदाता उपभोक्ताओं से उसे सेवा के मुताबिक शुल्क वसूलती है. कुछ उपभोक्ता कम शुल्क भुगतान के लिए तथाकथित मीटर के मुताबिक होने वाली बिलिंग को प्राथमिकता देंगे, जबकि कुछ अन्य ग्राहक सालाना या मासिक रूप से एकमुश्त तय रकम का विकल्प चुनेंगे. क्लाउड कंप्यूटिंग का इस्तेमाल आम तौर पर आप इंटरनेट के माध्यम से आंकड़ों को किसी को भेजने या उसे स्टोर करने के लिए करते हैं. इस मॉडल के साथ निजता और सुरक्षा का जोखिम भी जुड़ा हुआ है.

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