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क्लाउड कंप्यूटिंग की तकनीक..?

कुछ ऐसी निर्धारित तकनीकें हैं, जो क्लाउड कंप्यूटिंग के लिए कार्य करती हैं और इसे लचीला, विश्वसनीय व  इस्तेमाल करने योग्य बनाने का मंच तैयार करती हैं. ये तकनीकें इस प्रकार हैं :
वचरुअलाइजेशन : वचरुअलाइजेशन एक ऐसी तकनीक है, जो किसी एप्लीकेशन या संसाधन के एक भौतिक घटना को अनेक संगठनों या तय उपभोक्ताओं को आपस में शेयर करने की मंजूरी देती है. किसी भौतिक संसाधन को कोई खास तार्किक नाम देते हुए ऐसा किया जाता है और जब कोई  मांग करता है तो वह भौतिक संसाधन उसे मुहैया कराया  जाता है.
सर्विस-ओरिएंटेड आर्किटेक्चर : सर्विस-ओरिएंटेड आर्किटेक्चर अन्य एप्लीकेशंस को इस्तेमाल में लाने के संदर्भ में खास एप्लीकेशंस को सेवा में लाने के लिए मददगार होता है. यह तंत्र बिना किसी अतिरिक्त प्रोग्रामिंग या सेवाओं में बदलाव लाये विभिन्न वेंडर्स के बीच आंकड़ों के आदान-प्रदान को संभव बनाता है.
ग्रिड कंप्यूटिंग : ग्रिड कंप्यूटिंग का अर्थ कंप्यूटिंग का वितरण करना है, जिसमें विभिन्न स्थानों पर मौजूद कंप्यूटर्स के समूह किसी कॉमन मकसद को हासिल करने के लिए एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. ये कंप्यूटर एक-दूसरे से काफी दूर स्थित होते हैं. ग्रिड कंप्यूटिंग किसी जटिल टास्क को छोटी इकाइयों में बांट देता है. ये छोटी इकाइयां  ग्रिड के दायरे में सीपीयू को वितरित की जाती हैं.
यूटिलिटी कंप्यूटिंग : यूटिलिटी कंप्यूटिंग ‘पे पर यूज’ मॉडल पर आधारित है. खपत के मुताबिक सेवा के रूप में यह  मांग पर कंप्यूटेशनल संसाधन मुहैया कराता है. क्लाउड कंप्यूटिंग, ग्रिड कंप्यूटिंग ओर प्रबंधित आइटी सेवाएं यूटिलिटी कंप्यूटिंग के अवधारणा पर ही आधारित हैं.

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